मुशावरत ने अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच संघर्ष विराम का स्वागत किया
विश्व शांति को दरपेश खतरे पर गहरी चिंता जताई और फ़िलस्तीन में जारी युद्ध अपराधों की निंदा की
नई दिल्ली : ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिस-ए-मुशावरत, जो भारत के प्रमुख मुस्लिम संगठनों का महासंघ है, अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच घोषित संघर्षविराम का स्वागत करती है। यह युद्धविराम पश्चिम एशिया में और अधिक तबाही व तनाव से बचाव के लिए एक सकारात्मक और आवश्यक कदम है। मुशावरत के अध्यक्ष श्री फ़िरोज़ अहमद एडोकेट ने युद्धविराम का स्वागत करते हुए कहा है कि ईरान पर के हमले एक संप्रभु देश पर अवांछित आक्रमण और अंतर्राष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन हैं। राष्ट्रपति ट्रम्प ने हमले औरआक्रामकता से विश्व व्यवस्था और क्षेत्र की शांति के लिए गंभीर खतरे पैदा कर दिए हैं।
जबकि मुशावरत फ़िलस्तीन में इजरायली सेना द्वारा की जा रही निरंतर कार्रवाई, नागरिकों की मौत, और व्यापक मानवीय संकट को लेकर गहरी पीड़ा और कड़ी निंदा व्यक्त करती है। अस्पतालों, स्कूलों, पत्रकारों और राहतकर्मियों को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय क़ानून का गंभीर उल्लंघन है और युद्ध अपराध है। मुशावरत को इस बात पर भी गहरी चिंता है कि अमेरिका जैसी ताक़तवर वैश्विक शक्तियाँ इज़राइल को निरंतर समर्थन देकर उसके अत्याचारों को बढ़ावा दे रही हैं। फ़िलस्तीनियों पर दशकों से थोपे गए अन्याय, घेराबंदी, जबरन बेदखली और मूल अधिकारों से वंचित किए जाने की नीति अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए एक गंभीर चुनौती है।
मुशावरत अंतरराष्ट्रीय समुदाय, संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक नागरिक समाज से मांग करती है कि वे:
ग़ज़ा सहित सभी युद्ध क्षेत्रों में स्थायी संघर्षविराम सुनिश्चित करें और नागरिकों की रक्षा करें।
युद्ध अपराधों के दोषियों को अंतरराष्ट्रीय न्यायालयों के माध्यम से जवाबदेह ठहराएं।
इस संघर्ष की मूल जड़ इज़राइल का अवैध कब्ज़ा और अपार्थेड नीतियों को समाप्त करें।
ग़ज़ा की नाकाबंदी समाप्त करें और राहत सामग्री की अविरल आपूर्ति सुनिश्चित करें।
फ़िलस्तीन की आत्मनिर्णय की वैध माँग और अंतरराष्ट्रीय न्याय के आधार पर स्थायी समाधान के प्रयासों को पुनर्जीवित करें।
मुशावरत फ़िलस्तीन के पीड़ितों के साथ एकजुटता व्यक्त करती है और दुनिया भर में न्याय, मानव गरिमा और स्वतंत्रता के लिए आवाज़ उठा रहे सभी लोगों के साथ खड़ी है।
