मदरसे में आधुनिक शिक्षा और सामाजिक जागरूकता पर ज़ोर पसमांदा विकास फाउंडेशन का क़ौमी तालीमी बेदारी कार्यक्रम आयोजित नई दिल्ली: पसमांदा विकास फाउंडेशन के तत्वावधान में मदरसा अल-आफिया लिल-बनात, फिरोजपुर डहर,नगीना,नूह मेवात में एक क़ौमी तालीमी बेदारी कार्यक्रम आयोजित किया गया,जिसमें उलेमा,बुद्धिजीवी, महिला प्रतिनिधि और स्थानीय गणमान्य व्यक्तियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। इस अवसर पर फाउंडेशन के निदेशक-मेराज राईन ने कहा कि उलेमा हमारी प्रतिनिधित्व कर रहे हैं,जो हमारे लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि देश के उच्च धार्मिक शैक्षणिक संस्थानों को भी पसमांदा वर्ग को…
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भारतीय लोकतंत्र में पसमांदा (भारतीय मुसलमानों) की भूमिका
*भारतीय लोकतंत्र में पसमांदा (भारतीय मुसलमानों) की भूमिका* शारिक अदीब अंसारी, प्रो. देवेंद्र कुमार धूसिया *पसमांदा, एक फारसी शब्द जिसका अर्थ है ‘जो पीछे रह गए हैं’,* भारत में आर्थिक और सामाजिक रूप से हाशिए पर रहने वाले मुस्लिम समुदायों को संदर्भित करता है। इस समूह में मुख्य रूप से पिछड़ी जाति (अन्य पिछड़ा वर्ग या ओबीसी पसमांदा) और दलित (दलित पसमांदा) शामिल हैं। भारत में मुस्लिम आबादी का बहुमत होने के बावजूद, पसमांदा ने ऐतिहासिक रूप से बहिष्कार और भेदभाव का सामना किया है, न केवल व्यापक समाज…
انتخابات میں پسماندہ ووٹوں کا کردار
ڈاکٹر مظفر حسین غزالی انتخابی سیاست میں ذاتوں کی ہمیشہ اہمیت رہی ہے ۔ سیاسی پارٹیاں ٹکٹ دیتے وقت ذاتوں کے سمیکرن کو دھیان میں رکھتی ہیں ۔ پانچ ریاستوں میں ہونے والے انتخابات میں بھی اس کا نظارہ دکھائی دے رہا ہے ۔ مثلاً مدھیہ پردیش میں کانگریس نے 144 اور بی جے پی نے 136 سیٹوں کے لئے امیدواروں کی لسٹ میں بھی ذاتوں کا سمیکرن دکھائی دیتا ہے ۔ جنرل کیٹگری کے تحت کانگریس نے 47، بی جے پی نے 48، او بی سی 39 اور 40،…
