मोर्चा ने प्रधानमंत्री को सौंपा ज्ञापन, सुप्रीम कोर्ट से जल्द फैसला सुनाने की अपील
नई दिल्ली: ऑल इंडिया यूनाइटेड मुस्लिम मोर्चा के राष्ट्रीय कार्यालय, दिल्ली में एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया, जिसमें मोर्चा के राष्ट्रीय, राज्य और क्षेत्रीय नेताओं ने भाग लिया। इस अवसर पर मोर्चा के राष्ट्रीय प्रवक्ता हाफिज़ ग़ुलाम सरवर ने कहा कि 10 अगस्त का दिन हम ‘यौम-ए-अनसाफी’ (अन्याय दिवस) के रूप में इसलिए मनाते हैं क्योंकि इसी दिन भारत के संविधान की धारा 341 पर धार्मिक प्रतिबंध लगाकर मुसलमानों, विशेष रूप से दलित मुसलमानों के संवैधानिक, सामाजिक और आर्थिक अधिकारों पर रोक लगा दी गई थी।
उन्होंने कहा कि इस कदम ने भारत जैसे धर्मनिरपेक्ष देश में सांप्रदायिक राजनीति की नींव रख दी, जिसके नकारात्मक प्रभाव आज भी अल्पसंख्यकों और पिछड़े वर्गों पर साफ़ दिखाई दे रहे हैं। शिक्षा, व्यापार, रोजगार और राजनीतिक भागीदारी जैसे क्षेत्रों में दलित मुसलमानों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है, और केवल सुरक्षा के नाम पर उनका शोषण होता रहा है।
हाफिज़ ग़ुलाम सरवर ने बताया कि मोर्चा की ओर से वर्ष 2004 में सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL संख्या 180/2004)दायर की गई थी ताकि दलित मुसलमानों को संवैधानिक संरक्षण और समान अधिकार मिल सकें। लेकिन अब दो दशक बीत जाने के बावजूद उच्चतम न्यायालय की ओर से कोई अंतिम फैसला सामने नहीं आया है। उन्होंने भारत के मुख्य न्यायाधीश से अपील की कि इस मामले पर जल्द से जल्द फैसला सुनाया जाए ताकि गरीब और वंचित मुसलमानों को उनका संवैधानिक और कानूनी अधिकार मिल सके।
मोर्चा के उपाध्यक्ष अब्दुल हकीम हवारी ने कहा कि संविधान की धारा 341 पर धार्मिक प्रतिबंध ने देश में सांप्रदायिक राजनीति को बढ़ावा दिया है जिससे देश को भारी नुकसान हुआ है। एक ओर जहां बाबरी मस्जिद मुद्दे को राजनेताओं ने एक हथियार की तरह इस्तेमाल कर अपना लाभ उठाया, वहीं दूसरी ओर दलित मुस्लिम आरक्षण पर चुप्पी साध ली गई। इसलिए हमारा मांग है कि इस पर भी जल्द से जल्द निर्णय सुनाया जाए।
हाजी शरीफ इदरीसी ने इस अवसर पर कहा कि भारत का संविधान सभी नागरिकों को समानता का अधिकार देता है, लेकिन जब धर्म के आधार पर आरक्षण से वंचित किया जाता है, तो यह सीधे तौर पर संवैधानिक सिद्धांतों का उल्लंघन है। हम सरकार से मांग करते हैं कि दलित मुसलमानों को भी वही अधिकार दिए जाएं जो अन्य पिछड़े वर्गों को प्राप्त हैं। हम केवल मांग नहीं कर रहे, हम संवैधानिक और कानूनी आधार पर अपना अधिकार मांग रहे हैं।
प्रेस कांफ्रेंस में मोर्चा के महासचिव शफी मदारी, सचिव अकरम सागर, पश्चिम बंगाल अध्यक्ष जाने आलम शेख, डॉ. खुर्शीद आलम, शहज़ादा हुसैन, मोहम्मद उस्मान, नेमतुल्लाह कमाल, और मीडिया प्रभारी नफीस सुलमानी ने भी भाग लिया और अपने विचार रखे। सभी वक्ताओं ने एक स्वर में इस बात पर ज़ोर दिया कि धर्म के आधार पर संवैधानिक अधिकार से वंचित रखना पूर्णतः अन्यायपूर्ण है, इसलिए हमारी मांग है कि धारा 341 से धार्मिक प्रतिबंध हटाया जाए।
