क़ौमी तालीमी बेदारी कॉन्फ़्रेंस में बराबरी और शिक्षा पर ज़ोर, पिछड़े तबक़ों को आरक्षण देने की मांग
मदारिस में आधुनिक शिक्षा पर कार्यक्रम, मदरसों को “कंप्यूटर सेट” और पिछड़े छात्रों को “तालीमी किट” बांटे गए
नई दिल्ली: पसमान्दा विकास फ़ाउंडेशन के ज़ेरे-एहतिमाम मदनी हाल, जमीअत उलमा-ए-हिंद, आईटीओ दिल्ली में “मदारिस में आधुनिक शिक्षा” के विषय पर क़ौमी तालीमी बेदारी कॉन्फ़्रेंस का आयोजन किया गया। इस मौके पर समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी हस्तियों ने शिरकत की और शिक्षा व बराबरी की अहमियत पर ज़ोर दिया।
जमीअत उलमा-ए-हिंद के जनरल सेक्रेटरी मौलाना हकीमुद्दीन क़ासमी ने कहा कि शिक्षा के साथ सेहत भी ज़रूरी है, क्योंकि शिक्षा, हुनर, ताक़त और जज़्बा इंसान को मुल्क का कारगर शहरी बनाते हैं। उन्होंने पसमान्दा विकास फ़ाउंडेशन की सामाजिक सेवाओं की सराहना करते हुए कहा कि यह फ़ाउंडेशन क़ाबिले-तारीफ़ काम कर रहा है।
पसमान्दा विकास फ़ाउंडेशन के डायरेक्टर मिराज राईन ने “तालीमी जिहाद” का ऐलान करते हुए कहा कि शिक्षा तरक़्क़ी का सबसे बड़ा हथियार है और यह हर एक का बुनियादी हक़ है। उन्होंने पिछड़े दलित मुसलमानों को आरक्षण देने की मांग दोहराई और कहा कि दलित मुसलमानों अनुच्छेद 341 में शामिल किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने अपील की कि लोग सरकारी योजनाओं से भरपूर फ़ायदा उठाएं और ग़ैर-ज़रूरी चीज़ों से बचते हुए इंसानियत का पैग़ाम आम करें।
फ़ाउंडेशन की डायरेक्टर निख़त परवीन ने कहा कि औरतों को मज़बूत और ख़ुदमुख़्तार बनाने की सख़्त ज़रूरत है। उनके मुताबिक़, औरतों को सिर्फ़ दीनी तालीम ही नहीं बल्कि अस्री (आधुनिक) शिक्षा देना भी वक़्त की अहम ज़रूरत है, ताकि वह समाज की तरक़्क़ी में अहम किरदार अदा कर सकें।
कॉन्फ़्रेंस के दौरान मदरसों के लिए “कंप्यूटर सेट” और पिछड़े छात्रों के लिए “तालीमी किट” भी बांटी गई। वक्ताओं ने इसे एक सकारात्मक क़दम बताते हुए उम्मीद जताई कि इस तरह के तालीमी बेदारी प्रोग्राम समाज में तरक़्क़ी और बराबरी क़ायम करने में अहम साबित होंगे।
इस मौक़े पर कई अहम शख़्सियतों ने भी शिरकत की, जिनमें शामिल थे –
क़ारी असजद ज़ुबैर (सद्र, जामिया अरबिया शम्सुल उलूम शाहदरा दिल्ली), वसीम अक़राम क़ासमी (सद्र उलमा टीम, पसमान्दा विकास फ़ाउंडेशन), मौलाना ज़ाहिद मज़ाहिरी (हेड उलमा टीम, पसमान्दा विकास फ़ाउंडेशन), क़ारी अब्दुस्समी (जनरल सेक्रेटरी, दीनी तालीमी बोर्ड, जमीअत उलमा-ए-हिंद), अब्दुस्सुभान, एडवोकेट सरवर आलम (लीगल एडवाइज़र, पसमान्दा विकास फ़ाउंडेशन), असजद अदनान नदवी, ग़ुलमन अख़्तर, अशरफ़ ख़ान, ख़ैरुल बशर सलमानी, फरहा मिर्ज़ा, हुसैन फ़ातिमा, डॉक्टर ख़दीजा ताहिरा और सरवर आलम।
