क़ौमी तालीमी बेदारी अभियान के तहत कश्मीर में सफल  शिक्षा और जागरूकता सम्मेलन का आयोजन

Successful education and awareness conference organised in Kashmir under Qaumi Talimi Bedari Abhiyan

क़ौमी तालीमी बेदारी अभियान के तहत कश्मीर में सफल  शिक्षा और जागरूकता सम्मेलन का आयोजन

 

बारामुला, कश्मीर:
पसमांदा विकास फाउंडेशन (पीवीएफ) के तत्वावधान में *क़ौमी तालीमी बेदारी* अभियान के अंतर्गत जिला बारामुला के रफियाबाद क्षेत्र के लडू लादोरा में एक उद्देश्यपूर्ण एवं प्रभावशाली शिक्षा एवं जागरूकता सम्मेलन का सफल आयोजन किया गया। इस सम्मेलन का नेतृत्व नज़ीर अहमद मीर ने किया, जबकि बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षकों, छात्रों और गणमान्य नागरिकों ने भाग लिया।

इस अवसर पर पसमांदा विकास फाउंडेशन की टीम के सदस्य के रूप में मुश्ताक अहमद लोन, मोहम्मद शफी भट, आमिर अहमद खान, फैयाज़ अहमद भट, शनाज़ अहमद मीर, फैयाज़ अहमद लोन और अब्दुल हमीद वार उपस्थित रहे। वहीं महिला टीम का प्रतिनिधित्व फ़रीदा बेगम, शाइस्ता बानो, फ़ातिमा बेगम, शबनम बेगम, जबाना बानो, दिलशाद बेगम और सुरैया तबस्सुम ने किया। इसके अतिरिक्त क्षेत्र के अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी सम्मेलन में सहभागिता कर कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने इस बात पर ज़ोर दिया कि शिक्षा ही विकास, आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय स्थिरता की सबसे मज़बूत नींव है, जो प्रत्येक नागरिक का मूल अधिकार भी है। उन्होंने कहा कि शिक्षा में सशक्तिकरण के बिना न व्यक्ति का विकास संभव है, न समाज का और न ही देश की सर्वांगीण प्रगति।

वक्ताओं ने आम जनता से अपील की कि वे केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न शैक्षिक एवं कल्याणकारी योजनाओं का भरपूर लाभ उठाएं, अनावश्यक खर्चों से बचें तथा समाज में मानवता, भाईचारे और आपसी सम्मान के संदेश को बढ़ावा दें।

महिलाओं की शिक्षा पर विशेष बल देते हुए वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में महिलाओं को धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ आधुनिक एवं समकालीन शिक्षा से भी सुसज्जित करना अत्यंत आवश्यक है, ताकि वे समाज के निर्माण और विकास में प्रभावी एवं सक्रिय भूमिका निभा सकें।

सम्मेलन के सफल आयोजन पर पसमांदा विकास फाउंडेशन के निदेशक मेराज राईन ने सभी जिम्मेदार पदाधिकारियों, आयोजकों एवं कार्यकर्ताओं को बधाई देते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर की वादियों में रहने वाली जनता आज भी विभिन्न सामाजिक एवं शैक्षिक पिछड़ेपन से जूझ रही है, ऐसे में यहां शैक्षिक जागरूकता समय की एक अनिवार्य आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जब तक पसमांदा ( पिछड़े वर्गों ) का समुचित उत्थान नहीं होगा, तब तक देश वास्तविक अर्थों में प्रगति नहीं कर सकता।

मेराज राईन ने आगे कहा कि पसमांदा विकास फाउंडेशन देश के हर कोने में, विशेष रूप से शैक्षिक जागरूकता और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रही है और आशा है कि सामूहिक प्रयासों से वर्ष 2047 तक एक विकसित भारत का निर्माण संभव हो सकेगा।

अंत में प्रतिभागियों ने पसमांदा विकास फाउंडेशन की इन शैक्षिक पहलों की सराहना करते हुए इसे समय की अत्यंत महत्वपूर्ण आवश्यकता बताया। 

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