मेवात में “तालीमी जिहाद” की शुरुआत, पसमांदा विकास फाउंडेशन की बैठक में शिक्षा सुधार को मिला नया आयाम

मेवात में “तालीमी जिहाद” की शुरुआत, पसमांदा विकास फाउंडेशन की बैठक में शिक्षा सुधार को मिला नया आयाम

 

 

हरियाणा:

फिरोजपुर झिरका,मेवात,हरियाणा

 में शिक्षा सुधार को नई दिशा देने के उद्देश्य से शहर फिरोजपुर झिरका में पसमांदा विकास फाउंडेशन द्वारा एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में जिलेभर से सैकड़ों मदरसा संचालकों ने भाग लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य मेवात में आधुनिक, तकनीकी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देना तथा पसमांदा समाज के बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ना था। मदरसा संचालकों ने फाउंडेशन के निदेशक मेराज राईन और उनकी टीम के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि मेवात के लोग आधुनिक शिक्षा अपनाने के इच्छुक हैं, लेकिन संसाधनों की कमी के कारण यह क्षेत्र अब भी पिछड़ेपन की छाया में है।

 

बैठक में संचालकों ने बताया कि नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार मेवात देश के सबसे पिछड़े इलाकों में गिना जाता है, जिसका प्रमुख कारण शिक्षा में पिछड़ापन है। संचालकों का मानना था कि इस पिछड़ेपन की बेड़ियों को तोड़ने के लिए “तालीमी जिहाद” यानी शिक्षा के क्षेत्र में सामूहिक प्रयास बेहद जरूरी है। पसमांदा विकास फाउंडेशन इस अभियान के लिए एक मजबूत उम्मीद बनकर उभर रहा है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि हर मदरसे का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होना चाहिए और उन्हें हरियाणा सरकार से मान्यता मिलनी चाहिए, ताकि शिक्षा व्यवस्था और मजबूत हो सके। उनके अनुसार सरकार भी चाहती है कि मदरसे रजिस्टर हों, जिससे बच्चे आधुनिक और दीनी—दोनों तरह की तालीम के साथ भविष्य की चुनौतियों का सामना कर सकें।

 

बैठक में यह भी बताया गया कि पसमांदा विकास फाउंडेशन पहले भी मेवात में हजारों गरीब, यतीम और बेसहारा बच्चों को तालीमी किट और कंप्यूटर वितरित कर चुका है। निदेशक मेराज राईन ने कहा कि उनका मिशन सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वह गांव-गांव जाकर लोगों को शिक्षा के महत्व के प्रति जागरूक करेंगे। उन्होंने कहा कि मदरसों को सरकारी मान्यता दिलाने और ड्रॉप आउट बच्चों को दोबारा शिक्षा से जोड़ने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा। “जब तक बच्चे शिक्षा से नहीं जुड़ेंगे, तब तक क्षेत्र की तरक्की सपना ही बनी रहेगी,” उन्होंने कहा।

 

तालीमी जिहाद के पांच मुख्य प्रस्ताव तय

 

बैठक में मेवात में शिक्षा क्रांति को आगे बढ़ाने के लिए पांच प्रमुख प्रस्तावों पर सर्वसम्मति बनी—

 

1. गांव-गांव और गली-गली व्यापक शिक्षा जागरूकता अभियान चलाया जाएगा, ताकि हर परिवार शिक्षा की अहमियत समझ सके।

2. मदरसों को आधुनिक शिक्षा, कंप्यूटर शिक्षा और तकनीकी सुविधाओं से जोड़ा जाएगा।

3. स्कूल जाने वाले बच्चों को सुबह या शाम दीनी तालीम से जोड़ने की व्यवस्था की जाएगी।

4. मक़तब में पढ़ने वाले बच्चों को स्कूल शिक्षा से जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा।

5. नूंह जिले में आधुनिक टेक्नोलॉजी से लैस “पसमांदा मॉडल मदरसा” (छात्रावास) की स्थापना की जाएगी, जिसमें पसमांदा वर्ग के गरीब, यतीम, माजूर और बेसहारा बच्चे आधुनिक एवं दीनी तालीम एक साथ प्राप्त कर सकेंगे। बैठक में उपस्थित लोगों ने कहा कि यह प्रस्ताव मेवात में शिक्षा सुधार की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित होंगे। फाउंडेशन ने घोषणा की कि शीघ्र ही इन योजनाओं को ज़मीनी स्तर पर लागू किया जाएगा। 

 

 बैठक में मौलाना ज़ाहिद आलम मज़ाहिरी ( उलेमा टीम हेड-पी वी एफ ),

सैयद फर्रूख़ सेर ( गाइडेन्स बोर्ड ), अशरफ ख़ान,मो0 मुशर्रफ,पत्रकार ज़फरूद्दीन गुमाल,हाफ़िज़ सिद्दीक़ क़ासमी,ज़ुहेर क़ासमी,जाकिर हुसैन, किफायातुल्ला, नदीम खान सहित सैकड़ों उलेमा उपस्थित रहे।

बता दें कि पसमांदा विकास फाउंडेशन मुसलमानों को आधुनिक और जदीद शिक्षा से जोड़ने के लिए लगातार महत्वपूर्ण कार्य कर रही है। फाउंडेशन का उद्देश्य पसमांदा समाज के बच्चों और युवाओं तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अवसर पहुँचाना है। यह संस्था स्कॉलरशिप, मार्गदर्शन, करियर काउंसलिंग और आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण जैसी सुविधाएँ उपलब्ध करा रही है। फाउंडेशन का मानना है कि शिक्षा ही तरक्की का सबसे मजबूत साधन है। इसी सोच के तहत संस्था घर-घर जागरूकता अभियान चलाकर माता-पिता और युवाओं को नई शिक्षा पद्धतियों से अवगत करा रही है। बदलते दौर की जरूरतों को समझाते हुए उन्हें मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। कुल मिलाकर, फाउंडेशन की यह पहल पसमांदा समाज के एक उज्ज्वल और सशक्त भविष्य की नींव रख रही है।

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